रामायण – बालकाण्ड (भाग -4)

बालकाण्ड (भाग -4) दो0 गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।अयमय खांड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।व्याख्या : समता रूपी विश्वामित्र ने हृदय...

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